बम-बम भोला, शंकर रखवाला,
जिस पर तेरी कृपा हो जाए, जपे नाम की माला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
भस्म रमाए, जटा में गंगा,
त्रिनेत्र धारी, हरें भव-जंजाला।
दीन-दुखी का तू है सहारा,
हर लेता दुख विकराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
नीलकंठ तू, विष को पीकर,
जग को दिया अमृत का प्याला।
भोलेनाथ करुणा की धारा,
भक्तों पर प्रेम निराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
कैलाशपति, गिरिजा के स्वामी,
भक्तों के प्रभु अंतर्यामी निराला।
"शुभ" द्वार जो शीश झुकाए,
गिरते को तू संभाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
चंद्र सजे तेरे मस्तक ऊपर,
कंठ समाए विष काला।
काम क्रोध सब दूर भगाए,
तू ही जग का रखवाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Monday, 11 May 2026
Saturday, 2 May 2026
ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे
ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे,
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
मुझे मालूम है मेरे दिल में बसा
देखूँ कैसे तुझे ज़रा ये भी बता
तेरी याद में रुलाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी माया से जग को मैं देखता
तू खुद ना दिखे मेरी क्या है खता
आजा सामने तरसाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
है ये तेरी कृपा तेरा नाम लिया
"शुभ" भावना भरी तुझे याद किया
या तो यादों में आना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी करुणा से ही मुझे सत्संग मिला
करुणा-वरुणा सिंधु का ज्ञान मिला
सारे भेद छिपाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
मुझे मालूम है मेरे दिल में बसा
देखूँ कैसे तुझे ज़रा ये भी बता
तेरी याद में रुलाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी माया से जग को मैं देखता
तू खुद ना दिखे मेरी क्या है खता
आजा सामने तरसाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
है ये तेरी कृपा तेरा नाम लिया
"शुभ" भावना भरी तुझे याद किया
या तो यादों में आना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी करुणा से ही मुझे सत्संग मिला
करुणा-वरुणा सिंधु का ज्ञान मिला
सारे भेद छिपाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
3/May/2026
Wednesday, 15 April 2026
परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शुभकामनायें
एक अभिभावक के हृदय से निकले उद्गार
परिश्रम की "शुभ" राह पर, अपनी पहचान संवार ली।
अब आगे का पथ है विस्तृत, सपनों से भी और विशाल,
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
एकाग्र मन, दृढ़ संकल्प से, लक्ष्य सदा तुम साधना,
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
अब तक थे तुम श्वेत पत्र, इस पर भविष्य लिखा जाएगा,
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Thursday, 9 April 2026
तेरे पूजन को भगवान
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
Thursday, 2 April 2026
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसा कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसा कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तर्ज: तेरे नाम का दीवाना, तेरे घर को ढूंढता है
Wednesday, 1 April 2026
हे मारुति शिव अवतारी
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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