बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे
सेवा करो – सेवा करो – सेवा करो , गुरुवर के दुलारे
मैं मेरी को छोड दो, प्रभु से रिश्ता जोड़ दो
बाधाएं जो आ जाएँ, उनका रास्ता मोड दो
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
सेवा कर जीवन महकाओ, जीवन अपना दिव्य बनाओ
सत्संग सुमिरन खूब कमाओ, औरो को दर्शन करवाओ
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
महके जीवन “पुष्प” की भांति, ध्यान गुरु का रहे दिन राती
“शुभ” दर्शन की याद है आती, गुरु परंपरा यही सिखाती
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
एक भरोसा राम का है, बाकी जग किस काम का है?
ऐसी मस्ती मिलती कहाँ?, ये असर हरि नाम का है
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
Sunday, 22 March 2026
खोलो दया का द्वार
खोलो दया का द्वार मेरे स्वामी अब, खोलो दया का द्वार....
अंतर्यामी कहलाते हो, दया करो मेरे स्वामी -२
बाँह पकड़ लो, तार दो मुझको-२ नैया पड़ी मझधार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु कहाते, शिव स्वरुप में तुम प्रगटाते
ऋषि मुनि ज्ञानी भजते हैं -२, तेरी महिमा अपार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
“शुभ” तेरे दर पर आता रहेगा, प्रभु महिमा को गाता रहेगा
जब तक श्वास यह चलती रहेगी -२ पाता रहूँ तेरा प्यार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
तीन लोक तेरे गूंजे जयकारे, हम आये प्रभु द्वार तिहारे
आत्मज्ञान की मस्ती भर दो, दास करे ये पुकार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
संत शरण में जाकर जग ने, अपना भाग्य बनाया
सुन-२ कर "शुभ" महिमा गुरु की, द्वार तिहारे आया
भव से पार करोगे मुझको, ऐसा मुझे विश्वास
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Saturday, 21 March 2026
शान निराली, साँई तेरी शान निराली
शान निराली, साँई तेरी शान निराली,
तीन लोक की, दाता करे रखवाली
कैसे - कैसे अनुभव अपने, दुनिया को बतलायें,
महिमा तेरी गा पायें, वो शब्द कहाँ से लायें,
तेरे नाम की ज्योत से है -२, दुनिया उजियाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मुख मंडल पर आभा ऐसे, जैसे सूरज चमके,
एक झलक से छंट जाते हैं, काले बादल गम के,
भर देते हैं झोली उसकी -२, जो भी आता खाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
ब्रह्मज्ञान का दिया जलाकर, जग उजियारा करते,
सत्संग रुपी गंगाजल से, सबको निर्मल करते,
हर दर पर ना मस्तक टेकें -२ हम बापू के सवाली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
संत शरण जो जन पड़े, वो जन उद्धरणहार,
संत की निंदा नानका ,बहुरि - बहुरि अवतार,
सत्संग रुपी "शुभ" अमृत की -२, भर-भर देते प्याली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मैं मेरी के फंद हटाकर, प्रभु से नाता जोड़ते,
सुनकर के फरियाद भगत की, नंगे पैरों दौड़ते,
हमने पाकर शरण गुरु की -२, किस्मत अपनी जगा ली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तीन लोक की, दाता करे रखवाली
कैसे - कैसे अनुभव अपने, दुनिया को बतलायें,
महिमा तेरी गा पायें, वो शब्द कहाँ से लायें,
तेरे नाम की ज्योत से है -२, दुनिया उजियाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मुख मंडल पर आभा ऐसे, जैसे सूरज चमके,
एक झलक से छंट जाते हैं, काले बादल गम के,
भर देते हैं झोली उसकी -२, जो भी आता खाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
ब्रह्मज्ञान का दिया जलाकर, जग उजियारा करते,
सत्संग रुपी गंगाजल से, सबको निर्मल करते,
हर दर पर ना मस्तक टेकें -२ हम बापू के सवाली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
संत शरण जो जन पड़े, वो जन उद्धरणहार,
संत की निंदा नानका ,बहुरि - बहुरि अवतार,
सत्संग रुपी "शुभ" अमृत की -२, भर-भर देते प्याली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मैं मेरी के फंद हटाकर, प्रभु से नाता जोड़ते,
सुनकर के फरियाद भगत की, नंगे पैरों दौड़ते,
हमने पाकर शरण गुरु की -२, किस्मत अपनी जगा ली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Friday, 20 March 2026
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
चाहे बैरी हो जग सारा, चिंता काहे की
वो हारे का सहारा, चिंता काहे की
चाहे जिस भी दिशा में जाओ, मंदिर तेरा मिलता
भक्तों का रहता है मेला, आनंद खूब बरसता
"शुभ" जय जयकार पुकारा, चिंता काहे की
जो भी तेरे दर पे आया, खाली ना लौटाया
मनोकामना करके पूरी, खुशियों से घर आया
सबका तू ही सहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
हारे को तू जीत दिलाए, बिगड़ी बात बनाए
डूबती नैया पार लगाकर, भव से पार लगाए
मेरा श्याम पालनहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
घर घर तेरी ज्योत जगे है, श्याम धुनि को गाया
संकट सारे दूर हुए जब, श्याम नाम अपनाया
छंट गया अँधियारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
ढोल नगाड़े बाज रहे, श्याम ध्वजा लहराये
देख तेरा शृंगार सांवरे, मन ही मन हर्षाये
उठो करो जयकारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
चाहे बैरी हो जग सारा, चिंता काहे की
वो हारे का सहारा, चिंता काहे की
चाहे जिस भी दिशा में जाओ, मंदिर तेरा मिलता
भक्तों का रहता है मेला, आनंद खूब बरसता
"शुभ" जय जयकार पुकारा, चिंता काहे की
जो भी तेरे दर पे आया, खाली ना लौटाया
मनोकामना करके पूरी, खुशियों से घर आया
सबका तू ही सहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
हारे को तू जीत दिलाए, बिगड़ी बात बनाए
डूबती नैया पार लगाकर, भव से पार लगाए
मेरा श्याम पालनहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
घर घर तेरी ज्योत जगे है, श्याम धुनि को गाया
संकट सारे दूर हुए जब, श्याम नाम अपनाया
छंट गया अँधियारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
ढोल नगाड़े बाज रहे, श्याम ध्वजा लहराये
देख तेरा शृंगार सांवरे, मन ही मन हर्षाये
उठो करो जयकारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Saturday, 14 March 2026
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
पग-पग जादू भरा है ... माँ
आती है दुनिया मुरादें जहाँ लेकर
खाली ना कोई गया है ... माँ
द्वार तिहारे ध्यानु आया
अपना शीश माँ भेंट चढ़ाया
जीवन फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
वैष्णों माता का सेवक श्रीधर
माता ने भंडारा रखकर
भक्त को मान दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
एक राजा सूरथ की कहानी
खो गया राज पाट और रानी
सबकुछ फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
दूर दूर से भक्त हैं आते
पिण्डी रूप के दर्शन पाते
जब "शुभ" बुलावा गया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
पग-पग जादू भरा है ... माँ
आती है दुनिया मुरादें जहाँ लेकर
खाली ना कोई गया है ... माँ
द्वार तिहारे ध्यानु आया
अपना शीश माँ भेंट चढ़ाया
जीवन फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
वैष्णों माता का सेवक श्रीधर
माता ने भंडारा रखकर
भक्त को मान दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
एक राजा सूरथ की कहानी
खो गया राज पाट और रानी
सबकुछ फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
दूर दूर से भक्त हैं आते
पिण्डी रूप के दर्शन पाते
जब "शुभ" बुलावा गया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Thursday, 12 March 2026
माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
माँ जय हो तुम्हारी, माँ जय हो तुम्हारी
हे शैलपुत्री, हे ब्रह्मचारिणी
तेरी महिमा न्यारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे चंद्रघंटा, हे कुष्मांडा
तुम हो भयहारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे स्कंदमाता, हे कात्यायिनी
तुम मात हमारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे कालरात्रि, हे महागौरी
तम हरने वाली, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे सिद्धि दात्री, हे मात भवानी
तुम मंगल कारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
जय माता की, जय माता की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
माँ जय हो तुम्हारी, माँ जय हो तुम्हारी
हे शैलपुत्री, हे ब्रह्मचारिणी
तेरी महिमा न्यारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे चंद्रघंटा, हे कुष्मांडा
तुम हो भयहारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे स्कंदमाता, हे कात्यायिनी
तुम मात हमारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे कालरात्रि, हे महागौरी
तम हरने वाली, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे सिद्धि दात्री, हे मात भवानी
तुम मंगल कारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
जय माता की, जय माता की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Friday, 27 February 2026
होली का त्यौहार है आया
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
रंगों की बौछार है लाया, होली का त्यौहार
कान्हा मारे पिचकारी, राधा उड़ाए गुलाल
प्रेम के रंग से रंग गए सारे, सखियाँ ग्वाल-बाल
ऐसे रंग में रंगने को, हर कोई तैयार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
बरसाने में छाई मस्ती, गोकुल में शोर अपार
ढोल मंजीरे बाजे हैं, गूँजे जय-जयकार
नाच रहे सब झूम-झूम कर, भूल गए संसार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
नीले-पीले लाल गुलाबी, रंग अनोखे चार
भक्ति के रंग में जो रंग जाए, उसका बेड़ा पार
मन का मैल मिटाने आई, खुशियों की बौछार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
राधे-राधे गूँजे गलियाँ, गूँजे नंद के द्वार
कान्हा संग में खेल रही है, ब्रज की हर नार
प्रेम-सुधा बरसाने आया, श्याम सलोना यार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
छोड़ो मन की सारी दूरी, मिटा दो हर तकरार
एक रंग में रंग जाएँ हम, यही सच्चा त्यौहार
भक्ति-प्रेम से जग सज जाए, यही "शुभ" उपहार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गाज़ियाबाद
रंगों की बौछार है लाया, होली का त्यौहार
कान्हा मारे पिचकारी, राधा उड़ाए गुलाल
प्रेम के रंग से रंग गए सारे, सखियाँ ग्वाल-बाल
ऐसे रंग में रंगने को, हर कोई तैयार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
बरसाने में छाई मस्ती, गोकुल में शोर अपार
ढोल मंजीरे बाजे हैं, गूँजे जय-जयकार
नाच रहे सब झूम-झूम कर, भूल गए संसार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
नीले-पीले लाल गुलाबी, रंग अनोखे चार
भक्ति के रंग में जो रंग जाए, उसका बेड़ा पार
मन का मैल मिटाने आई, खुशियों की बौछार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
राधे-राधे गूँजे गलियाँ, गूँजे नंद के द्वार
कान्हा संग में खेल रही है, ब्रज की हर नार
प्रेम-सुधा बरसाने आया, श्याम सलोना यार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
छोड़ो मन की सारी दूरी, मिटा दो हर तकरार
एक रंग में रंग जाएँ हम, यही सच्चा त्यौहार
भक्ति-प्रेम से जग सज जाए, यही "शुभ" उपहार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गाज़ियाबाद
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